फलासी की भगवती चण्डिका का दक्षिण दिवारा संपंन

रुद्रप्रयाग,। तल्लानागपुर क्षेत्र के अंतर्गत चोपता फलासी में विराजमान मां भगवती चण्डिका की ऐतिहासिक दक्षिण दिवारा यात्रा 25 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद श्रद्धा और भक्तिमय वातावरण में विधिवत संपन्न हो गई है। इस दिव्य अवसर पर पूरी घाटी मां के जयकारों से गुंजायमान रही और हजारों की संख्या में दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने मां का आशीर्वाद लिया।
अपनी दक्षिण दिवारा यात्रा के दौरान मां चंडिका पारंपरिक वाद्ययंत्रों ढोल-दमाऊं की गूंज के बीच विभिन्न गांवों का भ्रमण कर पुनः अपने मूल स्थान चोपता फलासी पहुंचीं। मार्ग में ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर मां का स्वागत किया। महिलाओं की ओर से गाए गए मंगलगीतों और जगह-जगह आयोजित भंडारों ने संपूर्ण वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
समापन के अवसर पर आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजा-अर्चना संपन्न की। पण्डित त्रिलोचन भट्ट ने बताया कि इस अनुष्ठान के माध्यम से क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की गई है। उन्होंने जानकारी दी कि दक्षिण दिवारा के बाद अब पूरब दिवारा और अंत में घर दिवारा का आयोजन होगा। तुगेश्वर मंदिर समिति के अध्यक्ष मानवेन्द्र बर्त्वाल ने बताया कि आज से मां की पूरब दिवारा यात्रा का शुभारंभ होगा। इस चरण में भगवती चण्डिका बजूण, ढौढिक, दशज्यूला एवं घिमतोली क्षेत्रों का भ्रमण कर भक्तों को दर्शन देंगी। यात्रा के अंतिम चरण में एक विशाल बन्याथ का आयोजन किया जाएगा, जिसके साथ इस 25 साल बाद हो रहे ऐतिहासिक धार्मिक अनुष्ठान का विधिवत समापन होगा। इस आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय युवाओं ने व्यवस्थाओं की कमान संभाली, वहीं बुजुर्गों के मार्गदर्शन में सभी पौराणिक परंपराओं का पालन किया जा रहा है।

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