सड़क पर बने अधूरे पुल पर ग्रामीण जोखिम भरे आवागमन को मजबूर

उत्तरकाशी,। यमुना घाटी के कुपड़ा गांव में सरकारी उदासीनता और अधूरे विकास कार्यों के चलते ग्रामीणों को आज भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्याना चट्टी-कुपड़ा मोटर मार्ग पर करीब आठ वर्ष पूर्व बनना शुरू हुआ मोटर पुल निर्माण कार्य आज तक पूरा नहीं हो पाया है। पुल अधूरा रहने से ग्रामीणों को जोखिम भरे मार्ग से आवागमन करने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसको लेकर लोगों में विभागीय कार्यप्रणाली के खिलाफ नाराजगी बढ़ती जा रही है।
आठ वर्षों से अधूरा पड़ा है मोटर पुलरू ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2018 में लगभग पांच करोड़ रुपये की लागत से स्याना चट्टी-कुपड़ा मोटर मार्ग के डामरीकरण और मोटर पुल निर्माण का कार्य शुरू किया गया था। सड़क का डामरीकरण तो पूरा कर दिया गया, लेकिन पुल निर्माण कार्य एक एबटमेंट (पुल का आधार) बनने के बाद ही ठप पड़ गया। आठ वर्ष बीत जाने के बावजूद दूसरा एबटमेंट नहीं बन पाया है, जिससे पुल आज भी अधूरा खड़ा है। अधूरा पुल भी बारिश में क्षतिग्रस्त हो रहा है।
ग्रामीणों ने लगाया ये आरोपरू ग्राम प्रधान प्रभा राणा, पूर्व जिला पंचायत सदस्य भगत सिंह, पूर्व प्रधान शैलेन्द्र राणा, सुनील राणा, चैन सिंह, बलदेव सिंह और चित्रमोहन सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि पुल निर्माण रुकने से क्षेत्र के लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस स्थान पर एबटमेंट का निर्माण किया गया है, वह भू-धंसाव प्रभावित क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में निर्माण की गुणवत्ता और उसकी उपयोगिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
विभाग रो रहा बजट की कमी का रोनारू ग्रामीणों का कहना है कि इस संबंध में कई बार विभागीय अधिकारियों और प्रशासन को ज्ञापन देकर अवगत कराया गया, लेकिन हर बार बजट की कमी का हवाला देकर मामले को टाल दिया गया। उनका आरोप है कि विभाग की लापरवाही के कारण एक ओर सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।
ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी दीरू ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मामले का संज्ञान लेते हुए पुल निर्माण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पुल बनने से क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया, तो ग्रामीण आंदोलन और धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे।
ग्राम प्रधान प्रभा राणा ने कहा कि 8 साल से पुल नहीं बन पाया है। आधा-अधूरा पुल बनाकर छोड़ दिया गया। कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं। कोई सुनने को तैयार नहीं है। हम लोग दुर्गम इलाके में रहते हैं। सरकार को इस बात की भी कोई चिंता नहीं है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के अधिशासी अभियंता योगेंद्र कुमार ने बताया कि पुल निर्माण कार्य बजट के अभाव में रुका हुआ है। विभाग द्वारा आवश्यक धनराशि की मांग शासन को भेजी जा चुकी है। बजट स्वीकृत होते ही निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। फिलहाल ग्रामीण पुल निर्माण के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं।

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