जल जीवन मिशन 2.0 के तहत उत्तराखंड, कर्नाटक और त्रिपुरा के साथ सुधार संबंधी समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर

देहरादून,। जल जीवन मिशन (जेजेएम) 2.0 को 10 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी दिए जाने के बाद, सुधार से संबंधित समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर आज उत्तराखंड, कर्नाटक और त्रिपुरा राज्यों के साथ हस्ताक्षर किए गए। सुधार से संबंधित समझौता ज्ञापन में ग्राम पंचायत के नेतृत्व वाले, सेवा-आधारित और समुदाय-केंद्रित ग्रामीण जल प्रशासन मॉडल को अनिवार्य किया गया है, जो जल जीवन मिशन 2.0 के उद्देश्यों के अनुरूप है।
सुधार से संबंधित इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक ग्रामीण परिवार को पर्याप्त मात्रा में और निर्धारित गुणवत्ता का पेयजल नियमित रूप से उपलब्ध हो, इसके लिए जन भागीदारी को मजबूत किया जाएगा और ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों के सतत संचालन और रखरखाव के लिए संरचनात्मक सुधार किए जाएंगे, जिससे ग्रामीण समुदायों के जीवन स्तर में सुधार होगा और दीर्घकालिक जल सुरक्षा में योगदान मिलेगा, जो विकसित भारत /2047 के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप है।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और राज्य मंत्री वी. सोमन्ना की उपस्थिति में अलग-अलग निर्धारित बैठकों के दौरान समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। उक्त तीनों राज्यों के मुख्यमंत्री अपने-अपने निर्धारित समय के अनुसार वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए। उत्तराखंड के साथ समझौता ज्ञापन पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए, जो उत्तराखंड सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वर्चुअल माध्यम से इस कार्यक्रम में शामिल हुए। समझौता ज्ञापन पर स्वाति मीना नाइक, संयुक्त सचिव (जल), डीडीडब्ल्यूएस, और रणवीर सिंह चौहान, सचिव, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, उत्तराखंड के बीच हस्ताक्षर किए गए। समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान करने के लिए उत्तराखंड के निवास आयुक्त अजय मिश्रा, डीडीडब्ल्यूएस के कार्यालय में स्वयं उपस्थित थे। कर्नाटक राज्य के साथ समझौता ज्ञापन पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, आरडीपीआर और आईटी और बीटी मंत्री, प्रियांक खर्गे और राज्य के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की वर्चुअल उपस्थिति में औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए गए ।
डीडीडब्ल्यूएस की संयुक्त सचिव (जल) स्वाति मीना नाइक और कर्नाटक के ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज विभाग के सचिव समीर शुक्ला के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए और उसका आदान-प्रदान किया गया।

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