सरकार के मानव विकास इंडेक्स से सम्बन्धित आंकड़े धरातल से बिल्कुल अलगः काजी निजामुद्दीन

देहरादून,। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव एवं दिल्ली प्रभारी विधायक काजी निजामुद्दीन ने एक महत्वपूर्ण विषय पर पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार द्वारा पेश किये गये मानव विकास इंडेक्स से सम्बन्धित आंकडे धरातल से बिल्कुल अलग हैं। काजी निजामुद्दीन ने कहा कि एक तरफ सरकार मानव विकास इंडेक्स के बडे-बडे दावे प्रस्तुत कर रही है वहीं दूसरी ओर देहरादून की हवा दूषित होती जा रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में एक्यूआई का आंकडा 604 के पार पहुंच चुका था आज बडे-बडे अधिकारी और सरकार के मंत्री, विधायक बिना फिल्टर किया हुआ पानी नहीं पी सकते हैं और मानव विकास की बडी-बडी बातें करते हैं।
उन्होंने कहा कि बडे दुःख की बात है कि सरकार जनता के समक्ष सच को रखने से कतरा रही है। 2023 का गृह मंत्रालय का आंकडा जो कि सितम्बर 2025 में सामने आया कि उत्तराखंड में जन्म के समय लिंगानुपात की स्थिति अन्य राज्यों की तुलना में उत्तराखंड राज्य में सबसे दयनीय है। यहां पर 1000 पुरुषों पर 868 महिलाएं हैं ये आंकडे भारत सरकार के गृह मंत्रालय के हैं जिन्हें सरकार नकार नहीं सकती है। काजी निजामुद्दीन ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा पेश किये गये प्रदेश की आर्थिकी के आंकडे इतने मजबूती और अच्छे हैं तो प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन क्यों नहीं रूक रहा है इसका मतलब है कि सरकार जो आंकडे पेश कर रही है वे धरातल पर कहीं नहीं है। उन्होंने कहा कि 2016-17 में कांग्रेस की सरकार के समय इस प्रदेश में प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 12601 थी जो 2025 में 11116 बची हुई है। उच्च प्राथमिक विद्यालयों की संख्या 2889 थी जो अब 250 बची हुई है। माध्यमिक विद्यालयों की संख्या 1100 थी वह अब 921 ही बची हुई है। कुल विद्यालय 2017 में 17753 थे जो अब 16018 ही बचे हुए हैं यह सरकारी आंकडा है जो लोकसभा के प्रश्न संख्या 1436 के जवाब में 9 फरवरी 2026 को सदन में दिया गया है।
निजामुद्दीन ने कहा कि सामाजिक क्षेत्र के विकास शिक्षा, स्वास्थ्य एवं विकास का व्यय जो कि कांग्रेस की सरकार के समय उच्च स्तर पर था वह अब घट कर 40 प्रतिशत तक पहुंच गया है और ये उस डबल इंजन की सरकार के आंकडे हैं जो सबका साथ-सबके विकास की बात करती है। उन्होंने कहा कि आज उत्तराखंड की सबसे बडी समस्या बेरोजगारी तो है ही परन्तु बेरोजगारी के साथ-साथ अधरोजगारी भी है जहां पर शिक्षित युवा अपनी योग्यता से कम योग्यता वाले पदों पर नौकरी करने के लिए मजबूर है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कल आंकडा प्रस्तुत किया कि इस प्रदेश की पर कैपिटा इनकम 2लाख 73 हजार रूपये है जिसके हिसाब से प्रति व्यक्ति 23 से 24 हजार रूपये प्रतिमाह कमाता है। उन्होंने कहा ये आंकडे उन शहरी क्षेत्रों के हैं जहां पर एम्स है, प्राइवेट नौकरियां हैं, जहां पर अधिकारी रहते हैं इनकी सच्चाई पता करनी है तो पिथौरागढ़, अल्मोडा, बागेश्वर या खानपुर अथवा नारसन जाइये और पता करिये कि क्या जो लोग यहां रहते हैं उनकी आय 23-24 हजार रूपये है।
काजी निजमुद्दीन ने कहा कि पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे का आंकडा बताता है कि रोजगार की जो गुणवत्ता है वह प्रदेश में सबसे कम है। शिक्षा ज्यादा होने के बावजूद भी युवा कम दर्जें की नौकरी करने को मजबूर है। यह स्थिति राज्य को के-शेप्ड इकोनॉमी की तरफ लेजाता है जिसका अर्थ है कि अमीर और अमीर होता जा रहा है और गरीब और गरीब हो रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले 10 सालों में प्रदेश में निवेश की कमी की वजह से फैक्ट्रियां घटी हैं जिससे रोजगार पाने वाले लोगों की संख्या भी घटी है। 2027 में 2987 फैक्ट्रियां थी जो कि अब 2897 ही बची हुई हैं, अतः 90 फैक्ट्रियां कम हुई हैं जिनमें 2017 में 80967 लोग रोजगार में थे जो 2024 में घटकर 77001 हो गये हैं कुल कमी 3966 की हुई है। 2017 में इस प्रदेश में 10 चीनी मिलें थी जो कि घट कर 7 रह गई हैं। पत्रकार वार्ता में प्रदेश महामंत्री राजेन्द्र शाह, सोशल मीडिया सलाहकार अमरजीत सिंह, प्रवक्ता सुजाता पॉल, डॉ0 प्रतिमा सिंह, पूर्व सैनिक विभाग अध्यक्ष रामरतन नेगी, अभिनव थापर आदि उपस्थित थे।

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