कोच नताली फिगर स्केटिंग के जरिए स्थानीय समुदाय को लौटा रहीं कुछ खास

 

देहरादून,। फिगर स्केटिंग कोच नताली हर मायने में रोमांचक हैं। अमेरिकी नागरिक नताली जब 2018 में पहली बार लेह-लद्दाख पहुँचीं, तो इस पहाड़ी इलाके से उन्हें पहली ही नजर में प्यार हो गया। तभी से वे संघ शासित प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर बच्चों को प्रशिक्षण देती आ रही हैं, वह भी पूरी तरह निःस्वार्थ भाव से।
इस समय खेलो इंडिया विंटर गेम्स 2026 (केआईडब्ल्यूजी) का पहला चरण लेह में चल रहा है और खेलों के इतिहास में पहली बार फिगर स्केटिंग को शामिल किया गया है। ऐसे में नताली स्वाभाविक रूप से चर्चा के केंद्र में हैं और इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है।
नताली ने साई मीडिया से कहा, मैंने अपने जीवन का अधिकांश हिस्सा फिगर स्केटिंग में बिताया है। जब मुझे पहली बार भारत में फिगर स्केटिंग और लद्दाख में आइस स्केटिंग के बारे में पता चला। यहां की प्राकृतिक बर्फीली रिंक, लोग हॉकी खेलते हुए और आइस रिंक बनाते हुए तो मेरी रुचि और बढ़ गई। मैं प्राकृतिक बर्फ पर स्केट करना चाहती थी और उस समुदाय को देखना चाहती थी, जो आइस स्केटिंग के इर्द-गिर्द बना है।”
वे आगे कहती हैं, “जब मैं यहाँ आई, तो मुझे इस जगह से प्यार हो गया। स्केटिंग संस्कृति, लोगों का सहयोगी स्वभाव और सीखने के प्रति उनका जुनून, सब कुछ बेहद प्रेरक लगा। आप लद्दाख के सबसे छोटे गांव में भी जाएँगे, तो जमी हुई झीलें, सर्दियों में स्केट पहनकर अभ्यास करते लोग और सीखने की ललक दिख जाएगी। यही जुनून मुझे बार-बार लद्दाख वापस खींच लाता है।
नताली अमेरिका में सीनियर-स्तरीय फिगर स्केटर रह चुकी हैं और अपने देश में व्यापक रूप से कोचिंग दे चुकी हैं। लेकिन, लेह-लद्दाख में उनका काम उन्हें सबसे अलग बनाता है, वह यहाँ किसी भी तरह के आर्थिक लाभ या व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं हैं। बच्चों को फिगर स्केटिंग सिखाना उनके लिए प्रेम की अभिव्यक्ति जैसा है। आम दर्शकों की समझ के लिए वह खेलो इंडिया विंटर गेम्स 2026 में फिगर स्केटिंग की दो श्रेणियों- नवोदित (नोविस) और उन्नत (एडवांस्ड) के बीच का अंतर भी सरल शब्दों में समझाती हैं।

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